फ्यू डिकेड्स ऑफ़ अंडरवर्ल्ड - भाग - ७३ - १४ फरवर २०२६


नमस्कार दोस्तों कैसे हो आप सब ? आप सब जानते ही हो तीसरा हप्ते में हम बात करते हे अंडरवर्ल्ड के उस खतरनाक और दर्दभरे आंतक और उसके सामने लड़नेवाले जांबाजो की| तो चलिए  आज की कहानी शुरू करते है|

अध्याय 6: “ध्वज का पुनर्जन्म”

दिल्ली, 5 सितम्बर
कोलकाता पोर्ट की असफलता ने RAW और ध्वज कैडेट्स को हिला दिया था।
लेकिन साया जानता था — असली योद्धा वही है जो हार से सीखकर और मज़बूत होकर लौटे।

 नई रणनीति

RAW हेडक्वार्टर में साया ने टीम को बुलाया।
“हमने दुश्मन को कम आंका। अब हमें अपनी सोच बदलनी होगी।
ध्वज अब सिर्फ ट्रेनिंग प्रोग्राम नहीं रहेगा। ये एक नेटवर्क बनेगा — हर शहर, हर कॉलेज, हर गाँव में।”

  • आरव ने एक नया सिस्टम बनाया — ध्वज नेट, एक सुरक्षित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म जहाँ कैडेट्स तुरंत खतरे की जानकारी साझा कर सकते थे।
  • माया ने फील्ड सर्कल्स बनाए — छोटे-छोटे ग्रुप्स जो स्थानीय स्तर पर संदिग्ध गतिविधियों पर नज़र रखते थे।
  • कैप्टन वीर ने ध्वज कमांडो यूनिट को और सख्त ट्रेनिंग दी — ताकि अगली बार कोई गलती न हो।

 नया खतरा: “रेड स्पेक्टर”

📡 RAW को खबर मिली कि दुश्मन का नया लीडर सामने आया है — रेड स्पेक्टर.
उसका मकसद था भारत की रेलवे नेटवर्क को ठप करना।
अगर ये हमला सफल होता, तो देशभर की सप्लाई चेन रुक जाती।

 मिशन: “लोहे की दीवार”

साया ने कहा:
“ये मिशन हमारी असली परीक्षा है। अगर हम इसे जीत गए, तो ध्वज का पुनर्जन्म होगा।”

  • आरव ने रेलवे कंट्रोल सिस्टम को हैक करने की योजना बनाई।
  • माया ने संदिग्धों को ट्रैक किया — उन्हें पता चला कि रेड स्पेक्टर ने बिहार के एक छोटे स्टेशन को चुना है।
  • कैप्टन वीर ने कैडेट्स को तीन टीमों में बांटा — एक साइबर, एक फील्ड, और एक बैकअप।

 निर्णायक लड़ाई

रात 2 बजे, कैडेट्स स्टेशन पर पहुंचे।
रेड स्पेक्टर पहले से मौजूद था — उसके पास एक डिवाइस था जो रेलवे सिग्नल्स को ब्लॉक कर सकता था।

 लड़ाई शुरू हुई।
कैडेट्स ने पहली बार बिना डर के मुकाबला किया।
आरव ने डिवाइस को हैक कर लिया।
माया ने रेड स्पेक्टर को घेर लिया।
कैप्टन वीर ने उसे पकड़ लिया।

 ट्रेनें सुरक्षित रहीं।
देशभर की सप्लाई चेन बच गई।

 नई सुबह

6 सितम्बर की सुबह, अखबारों में एक ही खबर थी —
“ध्वज कैडेट्स ने रेलवे नेटवर्क बचाया।”

 देशभर के युवाओं ने ध्वज नेट पर जुड़ना शुरू किया।
अब ये सिर्फ RAW का मिशन नहीं था, बल्कि पूरे देश का आंदोलन बन चुका था।

अंतिम दृश्य

साया स्टेशन के प्लेटफ़ॉर्म पर खड़ा था।
ट्रेनें चल रही थीं, लोग सफ़र कर रहे थे।
एक बच्चा उसके पास आया और बोला:
“क्या अब हम जीत गए?”

साया मुस्कुराया:
“जीत कोई मंज़िल नहीं, एक सफ़र है।
आज हमने एक लड़ाई जीती है, लेकिन कल नई लड़ाई होगी।
ध्वज अब हर दिल में है — और जब तक ये ध्वज लहरता रहेगा, कोई हमें हरा नहीं सकता।”

वो फिर गायब हो गया — एक साया की तरह।

अगले हफ्ते देखेंगे की क्या होगा| तब तक  आप का कोई सजेशन और कमेंट हो तो मुझे मेरे सोश्यल मिडिया पे मुझे दे शकते हो मेरी सॉयल मिडिया प्रोफाइल की लिंक्स निचे दी हे | अंत में आप सभी का दिल से शुक्रिया और साथ ही साथ मेरे सोशयल मिडिया पार्टनर्स का भी दिल से धन्यवाद् क्योकि उनलोगो के बिना ना में ये सब लिख पाता | 


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